नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में बनारस के पास मंडुआडीह रेलवे स्टेशन देश का एक मात्र ऐसा रेलवे स्टेशन है जो देखने में एयरपोर्ट जैसा लगता है। इस रेलवे स्टेशन को वर्ल्ड-क्लास लेवल के रंगरूप में डिजाइन किया गया है। जिससे अक्सर लोग इसे कोई कॉर्पोरेट ऑफिस समझने की भूल कर जाते है।
मंडुआडीह रेलवे स्टेशन में शामिल है नई सुविधाएं

मंडुआडीह रेलवे स्टेशन की न केवल बिल्डिंग इसे सबसे अलग बनाती है, बल्कि यात्रियों के लिए बनाई गईं विभिन्न सुविधाएं भी एकदम अलग हैं। इन नई सुविधाओं में भारतीय रेलवे द्वारा मुहैया कराई गईं एलईडी लाइट्स, एयर कंडीशन वाली लॉन्ज और स्टेनलेस स्टील से बनी सीटें शामिल हैं। आने-जाने वाले एरिया की सुंदरता बढ़ाने के लिए फव्वारे लगाए गए हैं और यहां बड़ा वेटिंग एरिया, सर्कुलेटिंग एरिया, बुकिंग/रिजर्वेशन ऑफिस, कैफेटेरिया, फूड कोर्ट, वेटिंग रूम आदि मौजूद हैं।
स्टेशन परिसर के आर्किटेक्चर में काशी की झलक
स्टेशन में एसी लॉन्ज, एसी और नॉन-एसी रिटायरिंग रूम्स के साथ-साथ डॉरमेटरीज हैं। स्टेशन परिसर के आर्किटेक्चर में काशी की झलक दिखती है। प्लैटफॉर्म्स साफ-सुथरे हैं और एलईडी लाइट्स व एलसीडी डिस्प्ले पैनल के साथ चमकते हैं। परिसर में एलईडी लाइट्स के साथ खूब लाइटिंग की गई है और इनकी स्वच्छता का खूब ध्यान रखा गया है। इस स्टेशन पर न केवल यात्रियों को वर्ल्ड-क्लास इंटरनैशनल स्टैंडर्ड की सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी, बल्कि वाराणसी के नागरिकों को यहां रोजगार भी उपलब्ध कराया जाएगा। मंडुआडीह रेलवे स्टेशन पर फिलहाल 8 प्लैटफॉर्म है और यहां से 8 ट्रेनों की शुरुआत होती है।
रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर ‘बनारस’ रेलवे स्टेशन
मोदी सरकार मंडुआडीह रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर ‘बनारस’ रेलवे स्टेशन करने पर विचार कर रही है। पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री मनोज सिन्हा ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चिट्ठी लिखकर स्टेशन का नाम बदलने पर विचार करने का अनुरोध किया था। वाराणसी डिविजन के अधिकारी ने कहा, ‘मंडुआडीह नाम सुनने में अच्छा नहीं लगता है और इससे बनारस की विरासत से जुड़ाव भी नहीं होता।’ हालांकि, नए स्टेशन का निर्माण पूरा होने के तुरंत बाद ही चुनाव की घोषणा हो गई थी, इसलिए नाम बदलने का कोई नतीजा नहीं निकला। वाराणसी को बनारस और काशी भी बोला जाता है और यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है।